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सीकर भाजपा में ‘दुबली और दो साख’ की कहावत चरितार्थ?

▪︎ बाल मुकुंद जोशी
सीकर : राजस्थान में सत्ता में होने के बावजूद निकाय चुनावों में भाजपा के सामने कई जिलों में सियासी चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. इनमें सीकर की स्थिति कुछ ज्यादा ही दिलचस्प नजर आ रही है. यहां भाजपा के लिए नगर निकाय चुनाव में कमल खिलाना आसान राह नहीं दिख रहा. कांग्रेस का पंजा मुकाबले को पूरी तरह दिलचस्प बनाए हुए है.

नगरीय निकाय चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही सीकर में चुनावी मानसून ने जोर पकड़ लिया है. संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ गई है और राजनीतिक दलों के दफ्तरों में टिकट के दावेदारों की आवाजाही भी तेज हो गई है. वार्डों में दावेदार अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं.

इस बीच भाजपा और कांग्रेस के टिकट आवेदन को लेकर भी सियासी गलियारों में खूब चर्चा है. कांग्रेस जहां सीकर नगर परिषद के वार्ड पार्षदों के टिकट के इच्छुक दावेदारों से एक ही स्थान पर आवेदन ले रही है, वहीं भाजपा में अलग-अलग दो स्थानों पर आवेदन लिए जाने की चर्चा है. इसे लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

भाजपा खुद को ‘चाल, चरित्र और चेहरा’ वाली पार्टी बताती रही है, लेकिन टिकट वितरण की कवायद में सामने आ रही यह तस्वीर संगठन के भीतर चल रही खींचतान की ओर इशारा करती दिखाई दे रही है. सवाल यह भी है कि जब चुनावी मैदान में विपक्ष एकजुट होकर भाजपा को घेरने की तैयारी कर रहा हो, तब संगठन के भीतर अलग-अलग खेमों की सक्रियता पार्टी के लिए कितनी मुफीद साबित होगी?

बहरहाल, निकाय चुनाव की तारीख नजदीक आते-आते तस्वीर और साफ होगी. फिलहाल सीकर की सियासत में एक सवाल खूब तैर रहा है सत्ता की ताकत के बावजूद क्या भाजपा सीकर नगर परिषद में कमल खिला पाएगी, या पंजा फिर अपनी पकड़ मजबूत करेगा?