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जीणमाता की कथा श्रवण से मिलती है कष्टों से मुक्ति


मां के जयकारों से गूंजा कथा पंडाल, श्रद्धालुओं की भीड़ के आगे छोटा पड़ा पांडाल

नवलगढ़: मां जीण भवानी के जयकारों से बुधवार को कथा स्थल गूंज उठा। भक्ति में डूबे श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। यूनाईटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के तत्वावधान में बाबा रामदेव मंदिर के पास चल रही जीणमाता की पावन कथा के छठे दिन सैकड़ों श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। भीड़ इतनी उमड़ी कि कथा स्थल का पांडाल छोटा पड़ गया। जिसे जहां जगह मिली, वहीं बैठकर श्रद्धालुओं ने मां की कथा का श्रवण किया।

कथावाचक महंत डॉ. करणीप्रताप महाराज ने कहा कि विभिन्न रूपों में विराजमान मां जीण भवानी की सच्चे मन से उपासना, पुकार और सुमिरन करने पर मां अपने भक्तों की सहायता के लिए दौड़ी चली आती हैं। मां भक्तों के कष्ट दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक बार मां जीण भवानी के दरबार में पहुंचकर दर्शन और आशीर्वाद लेना चाहिए। शास्त्रों में भी भगवती की आराधना का महत्व बताया गया है। जिसने सच्चे मन से मां की आराधना की, उसे जीवन में सब कुछ प्राप्त हुआ।

बालाजी महाराज की महिमा का किया बखान

कथावाचक ने बालाजी महाराज की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि हनुमानजी कलियुग के सबसे चमत्कारी देव हैं। वे अजर-अमर हैं और संकटों का नाश करने वाले हैं। हनुमानजी साक्षात रुद्र के अवतार हैं। उन्होंने कहा कि हनुमानजी को भी शक्ति और आशीर्वाद मां भगवती से ही प्राप्त हुआ।

हर्षनाथ के विवाह और जीवण बाई के प्रसंग ने बांधा समां

कथा के दौरान हर्षनाथ के विवाह का प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने बताया कि विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ। छोटी बालिका जीवण बाई अपने बड़े भाई हर्षनाथ और भाभी के स्वागत के लिए मोतियों के थाल लेकर खड़ी थी। उसने बड़े उत्साह के साथ दोनों का स्वागत किया।

समय बीतने के बाद एक दिन एक महिला ने हर्षनाथ की पत्नी से कहा कि तुम्हारे घर में तो जीवण बाई की ही चलती है और हर्षनाथ भी उसी की बात मानते हैं। यह बात हर्षनाथ की पत्नी के मन में बैठ गई। एक दिन जीवण बाई अपनी सहेली के घर जाने की बात कहकर चली गई। इसी दौरान हर्षनाथ घर आए और पत्नी के कहने पर भोजन कर लिया। वापस लौटने पर जीवण बाई को जब इसका पता चला तो वह नाराज होकर एक कक्ष में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।

बहन की नाराजगी देखकर हर्षनाथ ने भी भोजन छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बहन भोजन नहीं करेगी, तब तक वे भी भोजन नहीं करेंगे। काफी मनुहार के बाद जीवण बाई ने भोजन किया। कथा के इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

इस अवसर पर बसंत सिंह शेखावत, श्याम परिवार नवलगढ़ के सदस्य, चर्तुभुज गुप्ता, विष्णु बासोतिया, अजय जांगिड़, मुरलीमनोहर चौबदार, सविता शर्मा, गौरीशंकर सहित श्रद्धालुओं ने मां जीण भवानी की आरती की।

गुरुवार को होगा कथा का समापन

कथावाचक ने बताया कि गुरुवार को कथा का समापन होगा। जयपुर से आए भक्तों की ओर से मंगल पाठ किया जाएगा। मंगल पाठ दोपहर सवा 12 बजे शुरू होगा। इसके बाद मां को चुनड़ समर्पित की जाएगी। दोपहर ढाई बजे बाद कथा की पूर्णाहुति होगी। समापन अवसर पर जीवण माता के काजल शिखर की ओर जाने और काजल शिखर को काजल से काला करने सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों की कथा सुनाई जाएगी।