जयपुर: निर्वाचन आयुक्त श्री राजेश्वर सिंह ने बताया कि प्रदेश में 'एक राज्य, एक चुनाव' के तहत नगरीय निकायों के आम चुनाव-2026 का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों, जिनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद एवं 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं, में चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयुक्त बुधवार को शासन सचिवालय स्थित राज्य निर्वाचन आयोग के सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा 309 नगरीय निकायों के आम चुनाव कराने के लिए चरणवार चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी, स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं।
आम चुनाव कार्यक्रम—
श्री सिंह ने बताया कि सदस्य पदों के लिए लोक सूचना 27 अगस्त 2026 को जारी की जाएगी। नामांकन पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। नामांकन पत्रों की संवीक्षा 1 सितंबर 2026 को होगी। अभ्यर्थिता वापस लेने की अंतिम तिथि 3 सितंबर 2026 निर्धारित है तथा इस दिन अपराह्न 3 बजे तक अभ्यर्थिता वापस ली जा सकेगी। चुनाव चिन्हों का आवंटन 4 सितंबर 2026 को किया जाएगा।
सदस्य पदों के लिए मतदान दो चरणों में होगा। प्रथम चरण का मतदान 9 सितंबर 2026 तथा द्वितीय चरण का मतदान 11 सितंबर 2026 को होगा। मतदान का समय प्रातः 7 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। दोनों चरणों में हुए मतदान की मतगणना 14 सितंबर 2026 को की जाएगी।
अध्यक्षीय पदों के लिए लोक सूचना 15 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी। नामांकन पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर 2026 होगी तथा नामांकन पत्रों की संवीक्षा 17 सितंबर 2026 को की जाएगी। अभ्यर्थिता वापस लेने की अंतिम तिथि 18 सितंबर 2026 है और इस दिन अपराह्न 3 बजे तक अभ्यर्थिता वापस ली जा सकेगी। चुनाव चिन्हों का आवंटन 18 सितंबर 2026 को अभ्यर्थिता वापसी का समय समाप्त होने के तुरंत पश्चात किया जाएगा।
अध्यक्षीय पदों के लिए मतदान 21 सितंबर 2026 को होगा। मतदान का समय प्रातः 10 बजे से अपराह्न 2 बजे तक रहेगा। मतदान समाप्ति के तुरंत बाद 21 सितंबर 2026 को ही मतगणना की जाएगी।
उपाध्यक्षीय पदों के लिए निर्वाचन 22 सितंबर 2026 को होगा। निर्वाचन प्रक्रिया के लिए बैठक प्रातः 10 बजे प्रारंभ होगी। नामांकन पत्र प्रातः 11 बजे तक प्रस्तुत किए जा सकेंगे तथा नामांकन पत्रों की संवीक्षा प्रातः 11.30 बजे से होगी। अभ्यर्थिता वापस लेने का समय अपराह्न 2 बजे तक रहेगा। यदि मतदान आवश्यक हुआ तो अपराह्न 2.30 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान कराया जाएगा तथा मतदान समाप्ति के तुरंत बाद मतगणना की जाएगी।
1.44 करोड़ से अधिक मतदाता करेंगे मतदान—
इन चुनावों में 309 नगरीय निकायों के कुल 1,44,03,853 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 73,98,415 पुरुष, 70,04,927 महिला तथा 511 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। नगर निगम जयपुर में सबसे अधिक 24,20,839 मतदाता हैं, जबकि नगरपालिका इन्द्रगढ़ में सबसे कम 4,744 मतदाता हैं।
वर्ष 2019 में 196 नगरीय निकायों में कुल 1,13,19,864 मतदाता थे। वर्ष 2026 में नगरीय निकायों की संख्या बढ़कर 309 होने के साथ मतदाताओं की संख्या में 27.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
आयु वर्ग के अनुसार 18 से 25 वर्ष तक के 21,30,043, 26 से 35 वर्ष तक के 36,60,211, 36 से 50 वर्ष तक के 41,70,693, 51 से 59 वर्ष तक के 20,02,199 तथा 60 वर्ष एवं अधिक आयु के 24,40,707 मतदाता हैं।
ईवीएम से होगा मतदान—
नगरीय निकाय चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के माध्यम से कराए जाएंगे। अलवर, भरतपुर, जयपुर, जोधपुर एवं कोटा जिलों में भारत निर्वाचन आयोग के स्वामित्व वाली एम-3 मॉडल की ईवीएम का उपयोग किया जाएगा। शेष 36 जिलों में राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान एवं राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश के स्वामित्व वाली मल्टी पोस्ट सिंगल वोट/मल्टी पोस्ट मल्टी वोट मॉडल की मशीनों का उपयोग किया जाएगा।
एक नगरपालिका में एक ही मॉडल की मशीनों का उपयोग किया जाएगा। आयोग द्वारा सभी जिलों को आवश्यक संख्या में ईवीएम का आवंटन किया जा चुका है। ईवीएम की आवाजाही की ऑनलाइन निगरानी के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को ईवीएम ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया है। इसी सॉफ्टवेयर के माध्यम से मतदान के लिए ईवीएम के आवंटन तथा मतदान एवं मतगणना दलों के गठन के लिए रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया भी की जाएगी।
वार्ड एवं मतदान केन्द्रों की संख्या में वृद्धि—
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025 में जनगणना वर्ष 2011 के आधार पर वार्डों का पुनर्गठन एवं परिसीमन किया गया है। नए परिसीमन के बाद वर्ष 2019 के 7,500 वार्डों की तुलना में वर्ष 2026 में वार्डों की संख्या बढ़कर 10,245 हो गई है। इसी प्रकार वर्ष 2019 में 10,153 मतदान केन्द्रों की तुलना में वर्ष 2026 में मतदान केन्द्रों की संख्या बढ़कर 16,465 हो गई है। वार्डों की संख्या में 36.6 प्रतिशत तथा मतदान केन्द्रों की संख्या में 62.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मतदान के लिए पहचान दस्तावेज—
राजस्थान के लगभग सभी मतदाताओं को मतदाता फोटो पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं। मतदान के समय मतदाता को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई मतदाता किसी कारण से फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो आयोग द्वारा अनुमोदित 11 वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से कोई एक मूल दस्तावेज प्रस्तुत कर मतदान किया जा सकेगा।
इन वैकल्पिक दस्तावेजों में आधार कार्ड, मनरेगा कार्ड, बैंक अथवा डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक, स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड/आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, भारतीय पासपोर्ट, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज, केन्द्र/राज्य सरकार, लोक उपक्रम अथवा पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा जारी फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र, सांसद एवं विधानसभा सदस्यों को जारी सरकारी पहचान पत्र तथा यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड शामिल हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन वैकल्पिक फोटो दस्तावेजों में केवल वही दस्तावेज मान्य होंगे जो नगरपालिका निर्वाचन की घोषणा से पूर्व जारी किए गए हों। आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि मतदान के समय इनमें से कोई एक वैध पहचान दस्तावेज अपने साथ अवश्य लेकर आएं।
मतदाता सहायता केन्द्र—
मतदान दिवस पर मतदान भवन के समीप मतदाताओं की सहायता के लिए मतदाता सहायता केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। इन केन्द्रों पर बूथ लेवल अधिकारी स्तर के कार्मिक नियुक्त किए जाएंगे। नए परिसीमन के कारण वार्डों की सीमाओं एवं मतदान केन्द्रों में परिवर्तन संभव है। मतदाता सहायता केन्द्र पर मतदाताओं को मतदाता सूची में अपना क्रमांक तथा संबंधित बूथ की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
1.15 लाख से अधिक कार्मिक होंगे तैनात—
309 नगरीय निकायों में दो चरणों में होने वाले चुनाव के लिए मतदान, मतगणना एवं अन्य चुनावी कार्यों में लगभग 1,15,255 कार्मिकों को नियोजित किया जाएगा। मतदान एवं मतगणना दलों के गठन के लिए रैंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा। मतदान दलों को दो स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
चुनाव के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने तथा शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए लगभग 98,790 पुलिस बल को नियोजित किया जाएगा।
चुनाव प्रक्रिया के पर्यवेक्षण के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त होंगे—
309 नगरीय निकायों के दो चरणों में होने वाले चुनाव के लिए प्रत्येक जिले में आवश्यकतानुसार एक या अधिक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। ये पर्यवेक्षक भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ एवं चयनित वेतन श्रृंखला तथा राजस्थान प्रशासनिक सेवा के सुपर टाइम स्केल अथवा इससे उच्चतर वेतन श्रृंखला के अधिकारी होंगे।
पर्यवेक्षकों द्वारा चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की निगरानी की जाएगी। विशेष रूप से नामांकन पत्रों की संवीक्षा, मतदान एवं मतगणना कार्य का पर्यवेक्षण किया जाएगा, ताकि चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सकें।
24x7 चुनाव नियंत्रण कक्ष—
आयोग मुख्यालय एवं जिला स्तर पर चुनाव की घोषणा के साथ ही चुनाव नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे। ये नियंत्रण कक्ष 24 घंटे, सातों दिन कार्य करेंगे। इनके माध्यम से चुनाव संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा तथा आमजन द्वारा चुनाव संबंधी गतिविधियों के बारे में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
अभ्यर्थियों के लिए चुनाव खर्च सीमा—
चुनाव के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा वाहनों एवं लाउडस्पीकरों के उपयोग तथा कटआउट, होर्डिंग, पोस्टर एवं बैनर आदि के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए आयोग द्वारा आवश्यक प्रतिबंध लगाए गए हैं।
लाउडस्पीकर के उपयोग के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट अथवा अन्य सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा। लाउडस्पीकर का उपयोग रात 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। चुनाव प्रचार के लिए वाहनों की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की गई है तथा संबंधित रिटर्निंग अधिकारी से वाहन के संपूर्ण विवरण के साथ लिखित अनुमति लेना आवश्यक होगा।
आयोग द्वारा निर्धारित अधिकतम चुनाव खर्च सीमा के अनुसार नगर निगम पार्षद के लिए 3,50,000 रुपये, नगर परिषद पार्षद के लिए 2,50,000 रुपये तथा नगरपालिका सदस्य के लिए 1,50,000 रुपये की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। चुनाव खर्च का पूरा विवरण परिणामों की घोषणा के 15 दिवस के भीतर निर्धारित प्रारूप में संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
संतान संबंधी प्रावधान हटाए गए—
राजस्थान राजपत्र अधिसूचना दिनांक 25 मार्च 2026 द्वारा राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की संबंधित धाराओं में संशोधन कर नगरीय निकायों के निर्वाचन के लिए संतान संबंधी प्रावधान हटा दिए गए हैं। इस संबंध में आयोग द्वारा सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधा—
आयोग द्वारा दिव्यांग मतदाताओं को मतदान केन्द्रों पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत दिव्यांग मतदाताओं की मैपिंग, प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी की नियुक्ति तथा आवश्यकता के अनुसार दिव्यांग मतदाताओं को मतदान बूथ तक लाने एवं मतदान के बाद वापस छोड़ने सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
आदर्श आचार संहिता लागू—
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित नगरीय निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक प्रभावी रहेगी।
आचार संहिता लागू होने से पहले जिन विकास कार्यों के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं अथवा जो विकास कार्य पहले से चल रहे हैं, वे आचार संहिता से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं नई योजनाएं, नए विकास कार्य एवं नए कार्यादेश आचार संहिता के दौरान प्रतिबंधित रहेंगे।
चुनाव के लिए बड़ी संख्या में कार्मिकों की आवश्यकता को देखते हुए संबंधित नगरीय निकाय क्षेत्र से होने वाले स्थानांतरण तथा संबंधित नगरीय निकाय क्षेत्र में किए जाने वाले पदस्थापन से संबंधित स्थानांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 के अंतर्गत नगरपालिका के निर्वाचन के संचालन का दायित्व राज्य निर्वाचन आयोग में निहित है। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 26 के अनुसार चुनाव कार्य में नियोजित समस्त कर्मचारी एवं अधिकारी निर्वाचन के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्त समझे जाएंगे। यदि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा निर्वाचन से संबंधित निर्धारित दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जाता है तो उसके विरुद्ध आयोग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अंत में राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, अभ्यर्थियों, मतदाताओं एवं मीडिया से अपील की है कि शांतिपूर्ण, स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने में आयोग को अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें। आयोग ने मतदाताओं से भी अपील की है कि वे निर्भीक होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं।