नवलगढ़ : जीण माता की भक्ति में मंगलवार को नवलगढ़ का माहौल भक्तिमय हो गया। यूनाईटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के तत्वावधान में बाबा रामदेव मंदिर के पास चल रही जीणमाता की कथा में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। नवलगढ़ के साथ झाझड़, बसावा, खिरोड़, मोहनवाड़ी सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचे। महिलाओं के साथ युवतियां, युवा और पुरुष भी बड़ी संख्या में कथा पंडाल में मौजूद रहे।
कथा के पांचवें दिन कथावाचक महंत डॉ. करणीप्रताप महाराज ने कहा कि पहले साधना के साधन कम थे, लेकिन मन में शांति अधिक थी। आज जीवन साधनों से संपन्न है, फिर भी मनुष्य का चित्त अशांत है। उन्होंने कहा कि मन की शांति और जीवन में सुख की प्राप्ति मां की शरण में आने से होती है। मां का आशीर्वाद मिलते ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगता है।
जीवण बाई की तपस्या से बरसे मेघ
कथावाचन के दौरान जीवण बाई की तपस्या का प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने कहा कि एक समय क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा। गांव में पानी और अन्न का संकट खड़ा हो गया। तब एक संत ने ग्रामीणों को बताया कि यदि कोई कुंवारी कन्या भगवती की तपस्या करे तो इंद्रदेव की कृपा से वर्षा हो सकती है।
ग्रामीणों ने जीवण बाई से तपस्या करने का आग्रह किया। जीवण बाई ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ज्योत प्रज्वलित कर तपस्या शुरू कर दी। सात दिन तक वह साधना में लीन रहीं। इस दौरान भाई हर्षनाथ ने भी भोलेनाथ के दरबार में जाकर बहन की कुशलता की कामना की और संकल्प लिया कि जब तक बहन सकुशल बाहर नहीं आएंगी, तब तक अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे।
सात दिन की कठोर तपस्या के बाद मां भगवती ज्योत के रूप में प्रकट हुईं। जीवण बाई ने मां से इंद्रदेव को वर्षा का आदेश देने की प्रार्थना की। मां के आदेश पर मेघ बरसे और अकाल से त्रस्त लोगों को राहत मिली। इसके बाद जीवण बाई सभी के कल्याण के लिए तपस्या स्थल से बाहर आईं। कथा के दौरान करणीमाता से जुड़े प्रसंग भी सुनाए गए।
हर्षनाथ के विवाह उत्सव में बांटी मेहंदी और प्रसाद
कथा स्थल पर मंगलवार को जीण भवानी के बड़े भाई हर्षनाथ का विवाह उत्सव भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। विवाह प्रसंग के दौरान जीण बाई के आनंद और भाई के स्वागत का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इस मौके पर माताओं-बहनों को माताजी की मेहंदी वितरित की गई। श्रद्धालुओं को फ्रूटी और गुलाब जामुन का प्रसाद भी बांटा गया।
आध्यात्मिक स्वास्थ्य भी जरूरी : डॉ. आप्टे
कथा स्थल पर प्रिंस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सीकर के डीन-प्रिंसिपल डॉ. राजेंद्र आप्टे भी पहुंचे। कथावाचक महंत डॉ. करणीप्रताप महाराज ने डॉ. आप्टे सहित वरिष्ठ पत्रकार बालमुकुंद जोशी, महेश मिश्रा, बाबूलाल शर्मा, सीताराम घोड़ेला, सत्यनारायण जांगिड़ और मुरलीमनोहर चौबदार का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
डॉ. राजेंद्र आप्टे ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ आध्यात्मिक स्वास्थ्य भी जरूरी है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अध्यात्म के लिए भी समय निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान वीरों और संतों की धरती है, जहां अनेक वीर योद्धाओं और संतों ने जन्म लेकर समाज को दिशा दी है।
कथा के दौरान जीण माता के जयकारों से कथा पंडाल गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति और आस्था के साथ कथा श्रवण कर मां जीण भवानी से सुख-शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की।