सीकर: इस्लामिया एज्युकेशनल, कल्चरल एंड वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित इस्लामिया स्कूल कॉलेज का शताब्दी समारोह (अज़ीमुश्शान जलसा) रविवार को कॉलेज परिसर में गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। समारोह में देशभर से आए अतिथियों, पूर्व विद्यार्थियों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि पंजाब के शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान लुधियानवी ने कहा कि इल्म (शिक्षा) इंसान की सबसे बड़ी ताकत है और शिक्षा से ही समाज तरक्की करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी दौलत है जिसे कोई छीन नहीं सकता। जिस समाज ने शिक्षा को अपनाया, उसने विकास और उन्नति की नई ऊंचाइयों को हासिल किया।
उन्होंने कहा कि कुरआन की पहली वह़्यी का शब्द "इक़रा" (पढ़ो) है, जो इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि इस्लाम की शुरुआत ही ज्ञान और शिक्षा से हुई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। युवाओं को डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और समाजसेवी बनकर देश और समाज की सेवा करनी चाहिए।
मौलाना लुधियानवी ने अभिभावकों से बच्चों, विशेषकर बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षित बेटियां पूरे परिवार और समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मेहनत, अनुशासन और अच्छे चरित्र को जीवन का आधार बनाने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर इंसान बनने का रास्ता भी है। इल्म के साथ अख़लाक़ (चरित्र) होगा तभी समाज में वास्तविक तरक्की और अमन कायम होगा।
समारोह की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने इस्लाही एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। शताब्दी समारोह के अवसर पर संस्थान की सौ वर्षीय यात्रा को याद करते हुए शिक्षा, खेल, समाज सेवा और संस्थान के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाली करीब 225 प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। सम्मानित होने वालों में पूर्व अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय खिलाड़ी, पूर्व ट्रस्टी, प्रबंध समिति के पदाधिकारी, वर्तमान एवं पूर्व प्रधानाचार्य, भामाशाह तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले पूर्व विद्यार्थी शामिल रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सोसायटी के अध्यक्ष हाजी अनवर अहमद कुरेशी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री प्रो. अख्तरुल वासे तथा समाजसेवी अब्दुल सत्तार जाटू के पुत्र हनान जाटू उपस्थित रहे।