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युवक कांग्रेस चुनाव का सीधा असर सीकर की सियासत पर पड़ना तय

राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में सीकर जिला हमेशा से शक्ति का प्रमुख केंद्र रहा है. हालांकि बीते कुछ समय से जिले के वरिष्ठ नेताओं के उम्रदराज होने के चलते संगठनात्मक सक्रियता में कमी महसूस की जा रही है. ऐसे माहौल में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने अकेले दम पर ‘हाथ’ को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाल रखी है.

इसी बीच युवक कांग्रेस संगठन के चुनावों ने सीकर की सियासत को फिर से गर्मा दिया है. अपनी राजनीतिक पारी के अंतिम दौर में खड़े महादेव सिंह खण्डेला, राजेंद्र पारीक, दीपेंद्र सिंह शेखावत, परसराम मोरदिया और सुरेश मोदी जैसे दिग्गज ‘एक और मौका’ मिलने की आस में फिलहाल खामोशी ओढ़े हुए हैं.
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए उपजाऊ राजनीतिक जमीन माने जाने वाले सीकर में अब नया नेतृत्व उभरता दिख रहा है. युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकुल खींचड़ ने जिस आक्रामक अंदाज में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी ठोकी है, उसने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है. उनके तेवर संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में सीकर की राजनीति नए रंग में नजर आ सकती है.

हालांकि मुकुल खींचड़ की यह सक्रियता डोटासरा खेमे को रास नहीं आ रही है. उनके समर्थक अभिषेक चौधरी के पक्ष में मजबूती से रणनीति बिछा रहे हैं. यह मुकाबला केवल संगठनात्मक चुनाव नहीं, बल्कि वर्चस्व और ‘चौधराहट’ की लड़ाई बनता जा रहा है. डोटासरा खेमे की कोशिश है कि भविष्य में उनके ही क्षेत्र और सामाजिक समीकरण से कोई नई चुनौती खड़ी न हो.

इस बीच एक अन्य प्रत्याशी राजकुमार परसवाल का नाम भी चर्चा में है, जिनका संबंध भी सीकर से है, लेकिन मौजूदा माहौल में मुकुल खींचड़ जितनी राजनीतिक ऊर्जा उनके पक्ष में दिखाई नहीं देती.

अगले महीने होने वाले युवक कांग्रेस चुनाव न केवल संगठन की दिशा तय करेंगे, बल्कि सीकर जिले की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत भी दे रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इन चुनावों के जरिए सीकर संसदीय सीट की भविष्य की पटकथा भी लिखी जा सकती है.