संगठन को मजबूत करने के नाम पर हाल ही में एक जाति विशेष के प्रति उनके अनुराग से अन्य जातियों में अंदर खाने गहरी नाराजगी व्याप्त हो चुकी है.ऐसी स्थिति को काबू करने के लिए प्रदेश एनएसयूआई अध्यक्ष के चयन में मीणा,गुर्जर और अन्य किसी जाति के कर्मठ छात्र नेता को आगे लाना बेहतर होगा.
दिल्ली में पिछले दिनों #NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर विनोद जाखड का मनोनयन का फैसला जबरदस्त है. इससे निर्णय से कांग्रेस की छात्र राजनीति ताकतवर होगी. क्योंकि विनोद जाखड सुलझा छात्र नेता होने के साथ-साथ पिछड़ी जाति से है.
कमोबेश पार्टी के जिम्मेदार नेताओं को जयपुर के लिए भी ऐसा ही फैसला करना चाहिए ताकि सत्ता को ताल ठोक कर चुनौती दी जा सके. दरअसल यह सच इस दौर की सियासत में 'चांदी की टकसाल' जिसके पास होगी वो चमचमाता नेता नजर आता है लेकिन यह भी उतनी सच्चाई है कि जरूरी ही नहीं चमकने वाला हीरा ही हो.
बहरहाल पीसीसी चीफ को भविष्य में गहलोत जैसी ऊंचाई छुनी है तो सोशल इंजिनियरिंग करनी होगी और दूसरी जाति के युवा नेताओं को अपणायत देनी होगी.जिससे उनकी स्वयं की सियासत का रंग तो खिलेगा ही खिलेगा.साथ ही पंजे की पकड़ भी ओर मजबूत होगी. कांग्रेस के नेताओं को हवा का रुख जरूर समझ लेना होगा,चुनाव के मैदान में गमछा हिलाकर और डायलॉग बाजी से सत्ता की सीढी पर चढ़ने के मुगालते भारी पड़ सकते है.