नवरात्र में शक्ति की आराधना के बीच राजस्थान की सियासत के दो प्रमुख चेहरे मंदिरों में नजर आए. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वागड़ की आराध्य मां त्रिपुर सुंदरी के दरबार में पूजा-अर्चना की, तो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित तनोट राय माता मंदिर में धोक लगाई. दोनों नेताओं की धार्मिक यात्राओं को आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में इनके राजनीतिक मायनों पर भी चर्चा है.
राजनीति में धार्मिक आस्था व्यक्तिगत विश्वास का विषय है, लेकिन जब सत्ता और विपक्ष के बड़े चेहरे शक्तिपीठों पर पहुंचते हैं, तो उनके कदमों पर सियासी नजरें टिकना स्वाभाविक है.
भजनलाल शर्मा के लिए मां त्रिपुर सुंदरी का दरबार और अशोक गहलोत के लिए तनोट राय माता का मंदिर आस्था के प्रमुख केंद्र हैं. ऐसे में इन यात्राओं को केवल पूजा-पाठ तक सीमित रखकर देखने के बजाय इनके व्यापक राजनीतिक संदर्भों पर भी चर्चा हो रही है.
भजनलाल शर्मा जहां मुख्यमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, वहीं गहलोत कांग्रेस की राजनीति में अपना प्रभाव बनाए हुए हैं.दोनों नेताओं की मंदिर यात्राओं के बीच एक समानता है शक्ति की आराधना और भविष्य के लिए मंगलकामना. हालांकि, इन यात्राओं को किसी खास राजनीतिक रणनीति या भावी दांव से जोड़ने के लिए ठोस संकेतों की जरूरत होगी.
फिलहाल, नवरात्र की धार्मिक आस्था के बीच राजस्थान की सियासत में शक्तिपीठों की यह चर्चा दिलचस्प है. देवी के दरबार में दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी श्रद्धा व्यक्त की, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर भी रहेंगी कि आने वाले दिनों में उनके सियासी कदम किस दिशा में बढ़ते हैं.