■ बाल मुकुंद जोशी
कल की ही बात लगती है, जब हरदिल अजीज नेता जनाब अश्क अली टाक साहब अचानक हम सबके बीच से रुखसत हो गए थे। देखते ही देखते उनकी जुदाई को आज एक वर्ष पूरा हो गया। लेकिन वक्त गुजरने के बावजूद उनकी यादें कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के दिलों से धुंधली नहीं हुई हैं। बल्कि आज भी उनके जाने का खालीपन उतनी ही शिद्दत से महसूस किया जाता है।
राजस्थान की सियासत में अश्क अली टाक की पहचान महज एक नेता की नहीं, बल्कि हजारों युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने और उन्हें राजनीतिक जमीन देने वाले एक कुशल संगठनकर्ता और कमांडर की थी। प्रदेश के कोने-कोने में युवा कार्यकर्ताओं की मजबूत फौज खड़ी करने वाले टाक साहब जैसा राजनीतिक व्यक्तित्व सियासत के रंगमंच पर बिरले ही देखने को मिलता है।
आज जब सत्ता की राजनीति के आगे संगठन और जमीनी कार्यकर्ता पीछे छूटते नजर आते हैं, तब टाक साहब की कार्यशैली और कार्यकर्ताओं के प्रति उनकी आत्मीयता बार-बार याद आती है। उन्होंने राजनीति को केवल पद और सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं बनाया, बल्कि कार्यकर्ताओं को सम्मान, पहचान और आगे बढ़ने का अवसर देने की सियासत की।
उनके असमय निधन का दर्द उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनके साथ वर्षों तक कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले हजारों कार्यकर्ता भी आज उनकी कमी महसूस कर रहे हैं। बदलते राजनीतिक दौर में जब कार्यकर्ताओं को उपेक्षा और गुटबाजी की पीड़ा से गुजरना पड़ता है, तब अश्क अली टाक जैसे नेता और उनकी कार्यशैली और भी ज्यादा याद आती है।
नियति के फैसले को कोई रोक नहीं सकता, लेकिन कुछ व्यक्तित्व अपने काम और विचारों से वक्त की सीमाओं को पार कर जाते हैं। अश्क अली टाक भी उन्हीं नेताओं में शुमार थे, जिनकी याद उनके साथियों और कार्यकर्ताओं के दिलों में लंबे समय तक जिंदा रहेगी।
उनकी पहली बरसी पर यही दुआ है कि परवरदिगार कौमी एकता और भाईचारे के इस पैरोकार सियासतदार की रूह को सुकून और मगफिरत अता फरमाए।