सेना से सियासत तक का सफर तय करने वाले यशस्वी नेता की आज पुण्यतिथि है. विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे इस दिग्गज नेता का राजनीतिक सफर जितना लंबा और प्रभावशाली रहा, उतना ही उतार-चढ़ाव से भरा भी रहा.
लंबे समय तक संसद में सक्रिय रहे.पांच बार राज्यसभा और चार बार लोकसभा के सदस्य के रूप में देश की राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. केंद्र सरकार में रक्षा, वित्त, विदेश और कपड़ा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली और राज्यसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभाई.
पार्टी ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार भी बनाया.
लेकिन राजनीतिक जीवन में ऐसे मोड़ भी आए, जिन्होंने उनके सफर को विवादों से घेरा. जिन्ना पर लिखी पुस्तक के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया. वहीं कंधार कांड में आतंकवादियों को छोड़े जाने के फैसले को लेकर भी उन्हें राजनीतिक आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.
विडंबना यह रही कि जिस दल के वे संस्थापक सदस्यों में शामिल थे, उसी दल ने एक दौर में उनका टिकट काट दिया. इसके बाद उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरना पड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
इस तरह एक ऐसे राजनेता की लंबी और बहुआयामी राजनीतिक पारी का दुखदअंत हुआ, जिसने दशकों तक भारतीय राजनीति और संसद में अपनी अलग पहचान कायम रखी.
उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि.