फतेहपुर शेखावाटी में सभापति चुनाव की दहलीज़ पर दस्तक देते ही सड़कों पर उतरा मोटर साइकिलों का लंबा काफिला और 'भारत माता' के नारों से गूंजता शहर का हर कोना, महज़ एक चुनावी जुलूस नहीं था बल्कि शहर की राजनीति के सीने पर सीधे-सीधे उस 'मधु-महरिया' जोड़ी की दस्तक है, जिसने स्थापित सियासतदारों के दफ्तरों में सन्नाटा पसार दिया है.
राजनीतिक गलियारों की बंद बैठकों में भले ही अब तक इस गठजोड़ को 'अस्थायी' या 'बेअसर' आंकने की कोशिशें की जा रही थीं, लेकिन ज़मीन पर उमड़े इस हुजूम ने तमाम कयासों और पुराने गणित को एक झटके में ध्वस्त कर दिया है.
हवा का यह अचानक बदला रुख और दोनों की ज़मीनी पैठ, शहर के पुराने क्षत्रपों के लिए किसी सीधी चेतावनी से कम नहीं रही है. सड़कों पर दिखी इस लामबंदी ने चुनाव की बिसात पर ऐसा पासा फेंका है कि विरोधियों के खेमे में रणनीति से ज्यादा खलबली और असमंजस का माहौल बना दिया है.
हालाँकि, शक्ति प्रदर्शन का यह उफान आने वाली तारीखों में वोटों की पेटी तक कितना टिक पाता है और क्या वाकई सत्ता की चाबी तक पहुँच पाता है, यह तो भविष्य के गर्भ में है.
लेकिन इतना तय है कि मधु और महरिया के समीकरण ने विरोधियों की रातों की नींद और माथे की सिलवटें ज़रूर बढ़ा दी हैं.