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चंबल के बीहड़ों की अधूरी प्रेम कहानी: डकैत जगन गुर्जर और दस्यु सुंदरी कौमेश गुर्जर


चंबल के बीहड़ों ने कई खूंखार डकैतों की कहानियां देखी हैं. इन कहानियों में दुश्मनी, बदला, हिंसा और पुलिस मुठभेड़ों के साथ-साथ कुछ ऐसी प्रेम गाथाएं भी दर्ज हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा.ऐसी ही एक चर्चित कहानी डकैत जगन गुर्जर और दस्यु सुंदरी कौमेश गुर्जर की मानी जाती है.

बताया जाता है कि कौमेश गुर्जर बचपन से ही जगन गुर्जर को जानती थी. दोनों परिवारों के बीच मेलजोल था और एक-दूसरे के घर आना-जाना भी रहता था. इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता प्रेम में बदल गया.

इसी बीच कौमेश के जीवन में बड़ा मोड़ तब आया, जब उसके पिता और सरपंच छीतरिया गुर्जर की हत्या कर दी गई.कहा जाता है कि पिता की मौत का बदला लेने के संकल्प ने उसे चंबल के बीहड़ों की राह पर ला खड़ा किया. वह जगन गुर्जर के गिरोह में शामिल हो गई और देखते ही देखते चंबल की चर्चित महिला दस्युओं में उसका नाम लिया जाने लगा.

बीहड़ों की कठिन जिंदगी के बीच भी दोनों का प्रेम कायम रहा. वर्ष 2000 में जब कौमेश गर्भवती हुई, तब उसने अकेले ऊंट पर सवार होकर हिंडौन सिटी का रुख किया. वहां एक निजी नर्सिंग होम में उसने बच्चे को जन्म दिया. कुछ दिन बाद वह नवजात को साथ लेकर फिर उसी ऊंट पर सवार होकर वापस चंबल के बीहड़ों में लौट गई. यह घटना लंबे समय तक इलाके में चर्चा का विषय बनी रही.
बाद में कौमेश जेल पहुंच गई, जबकि जगन बाहर था.

 कहा जाता है कि दोनों एक-दूसरे से दूर नहीं रह पा रहे थे. इसी दौरान जगन ने प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण की शर्त रखी कि यदि उसे जेल में कौमेश के साथ रहने की अनुमति दी जाएगी, तभी वह सरेंडर करेगा. उस समय प्रशासन ने उसकी इस शर्त को स्वीकार किया और इसके बाद उसने आत्मसमर्पण किया. यह घटना भी उस दौर की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रही.

जगन गुर्जर को लेकर यह भी कहा जाता है कि पुलिस उसे लंबे समय तक गिरफ्तार नहीं कर सकी थी और उसने अपनी इच्छा से चार बार पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था.

जगन गुर्जर के पारिवारिक जीवन की बात करें तो उसकी तीन पत्नियां—ममता, कौमेश और निशा—बताई जाती हैं. उनसे उसके कुल आठ बच्चे हैं, जिनमें चार बेटे और चार बेटियां शामिल हैं.

चंबल की यह कहानी प्रेम, बदले, अपराध और परिस्थितियों के ऐसे मिश्रण की मिसाल मानी जाती है, जिसने वर्षों तक लोगों के बीच जिज्ञासा और चर्चा बनाए रखी. हालांकि इस कहानी से जुड़े कई दावे स्थानीय चर्चाओं और प्रचलित कथनों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सभी मामलों में उपलब्ध नहीं है.