बाल मुकुंद जोशी
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सीकर जिला कांग्रेस कमेटी की 51 सदस्यीय नई कार्यकारिणी घोषित कर दी गई, लेकिन लिस्ट आते ही पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह सियासी हलचल तेज हो गई.
प्रदेश नेतृत्व ने पुरानी 71 सदस्यीय कमेटी को भंग कर नई टीम उतारी है, इसमें एक संगठन महासचिव,एक कोषाध्यक्ष, 2 प्रवक्ता, 2 सोशल मीडिया प्रभारी, 10 उपाध्यक्ष, 15 महासचिव और 20 सचिवों को जगह दी गई है.
*58 'निष्क्रिय'आउट, 38 को मिला मौका*
सबसे बड़ा झटका पुराने पदाधिकारियों को लगा है, पार्टी ने साफ कर दिया कि 2023 में बनी पिछली कमेटी के 58 सदस्य और पदाधिकारी "निष्क्रिय" थे, इसलिए उनकी छुट्टी कर दी गई, वहीं नई कमेटी में 38 नए कार्यकर्ताओं को पहली बार मौका दिया गया है. बावजूद इसके 13 पुराने चेहरे ऐसे हैं जिन्हें फिर से जगह मिली है यानी कि *"निष्क्रिय"* की लिस्ट में कुछ *"एक्टिव"* भी निकल आए.
*टॉप 5 वाली कमेटी अचानक निष्क्रिय कैसे हो गई ?*
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पिछली कमेटी के 58 लोग 3 साल तक निष्क्रिय थे, तो फिर मल्लिकार्जुन खड़गे और गोविंद सिंह डोटासरा सीकर जिला कांग्रेस को को अनेक बार "प्रदेश की टॉप-5 कमेटी" क्यों बताते थे ?
राजनीतिक टीकाकारों का कहना है कि तीन साल तक पीठ थपथपाने और अब एक झटके में 58 लोगों को निष्क्रिय बता देने से वर्करों में गहरी नाराजगी है, कई नेताओं का कहना है कि "या तो पहले झूठ बोला गया या फिर अब बहाना बनाया जा रहा है.
बहरहाल डोटासरा का गृह जिला होने से हटाये गये पदाधिकारी खामोश जरूर है लेकिन उनके मन में ऐसे निर्णय से गहरी 'टस्क' जन्म ले लिया है.