पांच दशकों की राजनीति में अशोक गहलोत का अलग ही व्यक्तित्व रहा है. उनके राजनीतिक किरदार, रणनीति और बयानों को समझना हमेशा आसान नहीं रहा. बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषक भी कई बार उनके अगले कदम का सटीक आकलन नहीं कर पाए. उनका लंबा, सफल और प्रभावशाली राजनीतिक सफर इस बात का प्रमाण है कि वे भारतीय राजनीति के सबसे अनुभवी रणनीतिकारों में गिने जाते हैं.आज भी जिस ऊर्जा और सक्रियता के साथ वे सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, वह उल्लेखनीय है.
वास्तव में, गहलोत कांग्रेस संगठन की एक महत्वपूर्ण ताकत हैं, पार्टी के नेताओं के लिए उनके अनुभव से सीख लेना अधिक उपयोगी होगा, बजाय अनावश्यक प्रतिद्वंद्विता में उलझने के. जिस चुनौतीपूर्ण दौर से कांग्रेस गुजर रही है, उसमें उनके अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का प्रभावी उपयोग होना चाहिए.
जो लोग उन्हें युवाओं का विरोधी बताकर प्रचारित करते हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि राजस्थान में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का श्रेय भी काफी हद तक गहलोत को जाता है. उनके कार्यकाल में अनेक युवा नेताओं को अवसर मिला, जो आज प्रदेश की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं.
बहरहाल, यह स्पष्ट है कि गहलोत अभी भी सक्रिय राजनीति में लंबी पारी खेलने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं. उनके विरोधी चाहे कांग्रेस की संभावनाओं को लेकर कैसी भी राजनीतिक धारणा बनाने का प्रयास करें, लेकिन संगठन निर्माण, कार्यकर्ताओं से संवाद और राजनीतिक प्रबंधन की दृष्टि से आज भी उन जैसा अनुभवी संगठनकर्ता केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विरले नेता ही हैं.