सीकर : दानवीर, प्रतापी, लोक कल्याणकारी राव राजा कल्याण सिंह बहादुर के 140वें जन्म दिन पर जयंती समारोह व अलंकरण कार्यक्रम शनिवार को आयोजित किया गया। राजकुमार हरदयाल सिंह त्रैलोक्य राज्य लक्ष्मी देवी चैरिटेबल ट्रस्ट एवं सर्व समाज के संयुक्त तत्वावधान में गोपीनाथ गौशाला के सामने स्थित गोविन्दम में रावराजा कल्याण सिंह बहादुर द्वारा आज के आधुनिक सीकर के विकास के लिए किए गए कार्यों को याद किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक, शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी रही व अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष व जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेंद्र सिंह ने की। अतिथि के रूप में सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया, धोद विधायक गोरधन वर्मा, फतेहपुर विधायक हाकम अली, शिक्षाविद् व संगीतज्ञ् डॉ. घासीराम वर्मा, जिला कलेक्टर आशीष मोदी, पुलिस अधीक्षक प्रवीण नुनावत आदि रहे। कार्यक्रम का प्रांरभ राव राजा कल्याण सिंह बहादुर की प्रतिमा के समक्ष अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया। ट्रस्ट के मंत्री पवन मोदी ने पदाधिकारियों के साथ अतिथियों का स्वागत माल्र्यापण, साफा व प्रतिक चिन्ह भेंटकर किया।
उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि आधुनिक सीकर के स्पप्नदृष्टा राव राजा कल्याण सिंहजी ने अपने जीवन काल में शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा के लिए बहुत कुछ दिया था। कल्याण सिंहजी ने सीकर के साथ-साथ शेखावाटी व देश के लिए भी अपना सर्वस्व न्यौंछावर कर दिया। ऐसे दानवीर राजा के द्वारा प्रारंभ किए गये कार्यों को आगे बढ़ाना जीवन की सार्थकता होगी।
उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह जी के द्वारा किए गए कार्यों को सदियों तक याद किया जाएगा। कहा कि उनसे प्रेरणा लेकर सभी को अपने जीवन में 10 प्रतिशत भी ऐसे समाजहित के कार्य किए जाएं तो उनके द्वारा शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने की सार्थकता होगी। कहा कि महापुरूषों को याद करते हुए उनके जीवन पर कार्यक्रम, संगोष्ठियां आयोजित करने चाहिए नहीं तो युवा पीढ़ी उनको भूलती चली जाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेंद्र सिंह ने अतिथियों के लिए स्वागत भाषण दिया। कहा कि शाश्वत आलौक के प्रतिक सीकर के राव राजा कल्याण सिंह की जयंती पर वे उन्हें श्रद्धा से नमन करते हैं। कहा कि कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का वे स्वागत करते हैं। कहा कि राव शेखाजी के चरण जिस धरा पर पड़े ऐसी शेखावाटी में बालिका शिक्षा के लिए 31 करोड़ की लागत से सैनिक स्कूल की सौगात मिली है। कहा कि जन कल्याण की भावना से व कल्याण सिंहजी के नाम से ही आज उसी कल्याण का नाम हो रहा है।
सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर ने कहा कि जीवन तीन पन्नों में सिमटा है जन्म, कर्म व मृत्यु। सभी को जीवन के दूसरे पन्न में नाम अंकित करवाना चाहिए जो सदियों तक पढ़ा जाए। कल्याण सिंहजी ने परोपकार के कार्यों द्वारा दूसरे पन्ने में नाम दर्ज करवाया जो आज भी गर्व के साथ पढ़ा जाता है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया ने कहा कि कल्याण सिंहजी का इतिहास जनहित के लिए जमीन, भवन देने के लिए जाना जाता है। कहा कि जयपुर रियासत द्वारा कल्याण सिंहजी को बंदी बनाने पर जनआंदोलन हुआ अपने राजा को वापस लाने में मददगार साबित हुआ। कहा कि उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय को शिक्षा के लिए छात्रवृति देकर सम्मानित किया था। बच्चों को विद्यालय के लिए फीस, बुक, गणवेश देकर हौंसला बढ़ाया।
धोद विधायक गोरधन वर्मा ने कहा कि राव राजा कल्याण सिंहजी ने सीकर के साथ-साथ देश के लिए भी सर्वस्व न्यौंछावर कर दिया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सभी को अपने जीवन में राष्ट्र के लिए योगदान देना चाहिए। फतेहपुर विधायक हाकम अली ने कहा कि कल्याण सिंहजी शासक कम सेवक अधिक थे। वे हमेशा काम करवाने में विश्वास रखते थे। अपने जीवन में जितना हो सका उन्होंने उतने जनहित के कार्य किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बलवंत सिंह चिराणा, राजवीर सिंह शेखावत, गिरवर सिंह झाझड़ व जयपाल सिंह तारपुरा ने किया।
इनको मिला पुरस्कार
कार्यक्रम में सामाजिक क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य करने पर महाराज शेखाजी विभूषण एक लाख रुपए का प्रथम पुरस्कार प्रेमसिंह बाजौर को प्रदान किया गया। द्वितीय पुरस्कार राव राजा कल्याण सिंह रत्न 51 हजार का शिक्षाविद् डॉ. घासीराम वर्मा को प्रदान किया गया। कार्यक्रम वैद्य लालचंद शर्मा, सुनीता रेवाड़, साधना सेठी, परमिंदर कौर, शिशुपाल कुमावत, सुल्तान सिंह शेखावत को भी सामाजिक, शिक्षा आदि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर सम्मानित किया गया।
पुरस्कृत राशि जोडक़र वापस ट्रस्ट को भेंट की:
ट्रस्ट द्वारा पुरस्कृत व सम्मानित होने पर सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर ने पुरस्कार की राशि एक लाख में एक लाख ग्यारह हजार रूपये जोड़ते हुए वापस ट्रस्ट को ही जनहित के कार्यों के लिए भेंट दे दी। वहीं डॉ. घासीराम वर्मा ने भी पुरस्कार की राशि 51 हजार में एक लाख रूपये जोड़ते हुए पुरस्कार की राशि ट्रस्ट को ही भेंट कर दी।