कहने को राजनीति सेवा का माध्यम है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में यह कई जगह ‘धंधे’ का रूप लेती दिखाई देती है.यह महज अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है. ऐसे माहौल में जब कोई काबिल और नीयत से साफ व्यक्ति जनसेवा का सपना लेकर सियासत में कदम रखता है, तो उसे अक्सर निराशा और राजनीतिक दांवपेंचों का सामना करना पड़ता है.
इसी संदर्भ में हम बात कर रहे हैं पूर्व विधायक डॉ.सी.एस. वैद की, जिनका आज जन्मदिन है. वे स्व.श्री चंदन मल वैद के सुपुत्र हैं, जिन्होंने प्रदेश की राजनीति में पांच दशकों से अधिक समय तक ईमानदारी और सादगी के साथ अपनी पहचान बनाई.
डॉ. वैद ने चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया. जयपुर के एसएमएस अस्पताल में प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देने के बाद उन्होंने वर्ष 2003 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में प्रवेश किया. तारानगर की जनता ने उन्हें हाथों-हाथ स्वीकारा और वे विधानसभा तक पहुंचे.
चिकित्सा के माध्यम से मानव सेवा करने वाले डॉ. वैद ने जब राजनीति के जरिए जनसेवा का मार्ग चुना, तो जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि यहां के समीकरण और संघर्ष किसी ऑपरेशन से कम जटिल नहीं हैं. इसके बावजूद उन्होंने अपनी निष्ठा और सेवा भाव को बनाए रखा. हालांकि, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दलगत रणनीतियों के चलते उन्हें कई बार हार का सामना करना पड़ा.
वर्ष- 2008 में हार के बाद 2014 में भी उन्हें पराजय मिली. कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों से आहत होकर उन्होंने 2018 में निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें लगभग 42 हजार वोट मिले, लेकिन वे मामूली अंतर से पीछे रह गए.
राजनीतिक अस्थिरता और उपेक्षा से निराश होकर डॉ. वैद ने अंततः सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली. उन्होंने पुनः चिकित्सा क्षेत्र को ही अपनी सेवा का माध्यम बनाया और आज वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेषज्ञता का योगदान दे रहे हैं. अमेरिकन सर्टिफिकेट रिस्क कोडिंग के जरिए वे अमेरिका के मरीजों के स्वास्थ्य विश्लेषण में सहयोग कर रहे हैं.
डॉ. वैद की राजनीतिक यात्रा भले ही अपेक्षित सफलता तक न पहुंच सकी हो, लेकिन उनकी निष्ठा, ईमानदारी और सेवा भावना उन्हें आज भी विशिष्ट बनाती है. वे इस बात का उदाहरण हैं कि सच्ची सेवा का मार्ग कभी समाप्त नहीं होता, केवल उसका स्वरूप बदल जाता है.
डॉ.चंद्रशेखर वैद को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं.🎁