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गुदड़ी का लाल : झुंझुनूं का मुकुल चौधरी



राजस्थान के झुंझुनूं जिले की पहचान हमेशा से वीर सैनिकों की धरती के रूप में रही है. देश की सीमाओं की रक्षा के लिए यहां के सपूतों ने जिस शौर्य का परिचय दिया है, वही जज्बा अब खेल के मैदान में भी दिखाई देने लगा है.

कल ईडन गार्डन्स, कोलकाता के ऐतिहासिक मैदान पर इस जज्बे की झलक देखने को मिली, जब झुंझुनूं के गुढ़ा गौड़जी के युवा खिलाड़ी मुकुल चौधरी ने अपने बल्ले से ऐसा कमाल किया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया.

मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम हार के कगार पर खड़ी थी. जीत लगभग दूर होती जा रही थी, लेकिन तभी मुकुल चौधरी ने मैदान संभाला.अंतिम ओवरों में उन्होंने जिस निडरता और आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की, वह किसी रणभूमि में लड़ते योद्धा से कम नहीं थी.
मुकुल ने महज 27 गेंदों में 54 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 7 गगनचुंबी छक्के और 2 शानदार चौके शामिल थे. इस पारी ने न सिर्फ मैच का रुख पलट दिया, बल्कि टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया. कोलकाता की टीम को उसी के घर में हार का सामना करना पड़ा.

लेकिन इस जीत के पीछे एक ऐसी कहानी है, जो हर किसी की आंखें नम कर देती है. मैच के बाद मुकुल चौधरी ने जो कहा, उसने उनकी सफलता को और भी बड़ा बना दिया. उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए कर्ज लिया, यहां तक कि घर तक बेच दिया.

मुकुल की आंखों में चमक थी, लेकिन शब्दों में जिम्मेदारी— “अब सबसे पहले मैं अपने पिताजी का कर्ज उतारूंगा… उनकी मेहनत और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है.”
झुंझुनूं की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां के युवा चाहे सीमा पर हों या मैदान में, हर जगह देश और अपने परिवार का नाम रोशन करना जानते हैं.