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राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग :मुस्लिम विधायकों के फैसले पर उठे सवाल


■ बाल मुकुंद जोशी
राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. खास तौर पर उन मुस्लिम विधायकों के निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं, जो लंबे समय से कांग्रेस में अपने अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बात करते रहे हैं, लेकिन मतदान के समय उनके रुख ने भाजपा को सीधा लाभ पहुंचाया.

ओडिशा की बाराबती सीट से निर्वाचित विधायक सोफिया फिरदौस, जिन्हें प्रदेश की पहली मुस्लिम महिला विधायक होने का गौरव प्राप्त है, का नाम इस सूची में प्रमुखता से सामने आया है. उनके अलावा हरियाणा के पुन्हाना से विधायक चौधरी इलियास और हथीन से विधायक मोहम्मद इजरायल ने भी कथित तौर पर पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब रमज़ान का पवित्र महीना चल रहा है, जिससे इस मुद्दे को लेकर सामाजिक और नैतिक बहस भी तेज हो गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की क्रॉस वोटिंग न केवल पार्टी अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मतदाताओं के विश्वास को भी प्रभावित कर सकती है.
दिलचस्प पहलू यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी पर अक्सर मुस्लिम समुदाय को टिकट देने में संकोच बरतने के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में इन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा भाजपा के पक्ष में गया वोट राजनीतिक समीकरणों और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को लेकर कई तरह के संकेत देता है.

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी राजनीति में निष्ठा, रणनीति और अवसरवाद के बीच की रेखाएं लगातार धुंधली होती जा रही हैं.