■ बाल मुकुंद जोशी
राजस्थान की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता चौधरी नारायण सिंह ने आज जीवन के 94 वें वर्ष में प्रवेश किया हैं. सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बावजूद राज्य कांग्रेस की राजनीति में समय-समय पर उनकी उपस्थिति और प्रभाव महसूस किया जाता रहा है. करीब छह दशक लंबे उनके राजनीतिक जीवन को दबंग और बेबाक शैली की राजनीति के लिए जाना जाता है.
13 मार्च 1933 को सीकर जिले के छोटे से गांव डूकिया में जन्मे जाट नेता चौधरी नारायण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में स्पष्टवादिता और ठोस निर्णयों की राजनीति की. उनके फैसले अक्सर अटल और दूरदर्शी माने जाते रहे, वहीं उनके अक्खड़ और बेबाक स्वभाव के किस्से आज भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनते हैं.
सिंह की राजनीति का एक खास पहलू यह रहा कि उन्होंने हमेशा मेहनतकश, गरीब और कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं की खुलकर पैरवी की. यही कारण रहा कि संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में उनकी धाक लंबे समय तक बनी रही. उनके प्रभाव और व्यक्तित्व के कारण कई वरिष्ठ नेता भी उनके सामने सतर्क नजर आते थे.
हालांकि वे कम समय के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे, लेकिन उस दौरान उनकी कार्यशैली काफी प्रभावशाली और रोबदार मानी गई. राजनीतिक हलकों में उन्हें *‘ठाकरे’* के नाम से भी पुकारा जाता था. कहा जाता है कि जब कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल सोनिया गांधी से मुलाकात के लिए 10 जनपथ पहुंचा, तो वहां मौजूद एक वरिष्ठ नेता को उन्होंने सख्त शब्दों में फटकार लगाकर अपनी बेबाकी का परिचय दिया था.
चौधरी नारायण सिंह ने वर्ष- 1954 में अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की और वर्ष-2013 में सक्रिय राजनीति को विराम दिया. इस लंबे सफर में उन्होंने सरपंच, प्रधान और सीकर के जिला प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. खास बात यह रही कि वे 17 वर्षों तक जिला प्रमुख रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जाता है.
दांतारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने 1972 से 2013 के बीच लगातार दस बार चुनाव लड़ा, जिनमें से सात बार विधायक चुने गए. वे शिवचरण माथुर के नेतृत्व वाली सरकार में वन तथा खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री भी रहे.
उनकी राजनीतिक शैली का एक रोचक प्रसंग उनके पुत्र और विधायक वीरेंद्र सिंह भी बताते हैं. वीरेंद्र के अनुसार, जब वे विधायक का चुनाव लड़ना चाहते थे, तो उन्होंने अपने पिता से इसकी इच्छा जाहिर की.उस समय चौधरी नारायण सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे उन्हें सीधे टिकट नहीं दिला सकते. बाद में समर्थकों के सुझाव पर गुप्त मतदान के जरिए प्रत्याशी का चयन किया गया, जिसमें पंचायत के अधिकांश कांग्रेस सदस्यों ने उनका समर्थन किया. इसके बाद चौधरी नारायण सिंह ने कांग्रेस हाईकमान को उनके नाम की सिफारिश की.
आज वीरेंद्र सिंह लगातार दूसरी बार विधायक हैं और इसे वे अपने पिता के आशीर्वाद का परिणाम मानते हैं.फिलहाल चौधरी नारायण सिंह सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में समय-समय पर उनकी उपस्थिति दर्ज होती रहती है. उनके 94 वें जन्मदिन के अवसर पर समर्थक और शुभचिंतक उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना कर रहे हैं.