सीकर : चूरू और सीकर जिलों के सीमावर्ती इलाकों में बीते तीन दिनों से दहशत का कारण बना पैंथर आखिरकार वन विभाग की टीम के हाथ लग गया। मंगलवार शाम रतनगढ़ क्षेत्र के मोलीसर छोटा गांव में पैंथर को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। लगातार गांवों में आवाजाही के चलते ग्रामीण भयभीत थे, लेकिन पैंथर के पकड़े जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार, 10 जनवरी को रामगढ़ शहर से निकल रहे जयपुर–चूरू बाइपास पर एक घर में पैंथर के घुसने की सूचना मिली थी। इसके बाद सोमवार देर शाम सहनाली क्षेत्र में पैंथर की मूवमेंट की जानकारी वन विभाग को मिली। मंगलवार सुबह से टीम ने सहनाली से पैंथर के पगमार्क का पीछा शुरू किया, जो मोलीसर छोटा गांव के एक सरसों के खेत तक पहुंचे। दोपहर करीब तीन बजे पैंथर की सटीक लोकेशन कन्फर्म हुई।
लोकेशन मिलते ही जयपुर से विशेष ट्रेंकुलाइजर टीम को मौके पर बुलाया गया। फतेहपुर और लक्ष्मणगढ़ वन विभाग की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद पैंथर खेत में दिखाई दिया और शाम करीब 4.30 बजे उसे सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज कर लिया गया।
ट्रेंकुलाइज करने के बाद पैंथर को पिंजरे में डालकर दोबारा होश में लाया गया और वन विभाग की टीम उसे चूरू ले गई। शाम करीब 5.30 बजे पैंथर को चूरू पहुंचाया गया। वन विभाग की टीम ने तीन दिनों में करीब 70 किलोमीटर तक पगमार्क का पीछा किया।
उल्लेखनीय है कि सीकर जिले के फतेहपुर, रामगढ़ क्षेत्र और चूरू जिले के सीमावर्ती गांवों में पैंथर की आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई थी। पैंथर के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद इलाके में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।