सीकर:राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान 2.0 के प्रथम चरण में सीकर जिले ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त कर एक शानदार उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता जिले के जल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह योजना 15 फरवरी 2024 को बजट घोषणा के तहत शुरू की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के गांवों को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। प्रथम चरण में पूरे राजस्थान के पांच हजार से अधिक गांवों में 3500 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 1 लाख 10 हजार जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था।
सीकर जिले में इस योजना के तहत 12 ब्लॉकों की 65 ग्राम पंचायतों के 136 गांवों को शामिल किया गया और यहां 90 करोड़ रुपये की लागत से 4513 जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, वन, कृषि, उद्यान, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी तथा सिंचाई विभाग जैसे आठ विभागों के समन्वित प्रयासों से यह कार्य पूरा किया गया।
जिले में 3346 टांको, 713 फार्म पोण्ड्स, 61 एनीकट, 57 मिनी परकोलेशन टैंक, 55 रिचार्ज संरचनाएं, 21 तालाबो का निर्माण एवं जीर्णोद्वार, 275 स्प्रींकलर सिस्टम जैसी जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं। 31 दिसंबर 2025 तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, सीकर जिले ने निर्धारित 4513 कार्यों के मुकाबले 4820 कार्य पूरे कर 107 प्रतिशत प्रगति हासिल की, जो राज्य में सर्वाधिक है और इसी के आधार पर जिले को प्रथम स्थान मिला।
यह शानदार सफलता जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा की सतत निगरानी और मार्गदर्शन तथा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजपाल यादव के सहयोग का परिणाम है। इस अभियान से जिले के लोगों को फ्लोराइड-मुक्त शुद्ध वर्षा जल पेयजल के रूप में उपलब्ध हुआ है, साथ ही भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है। किसानों के खेतों में बने फार्म पॉन्ड्स से प्रति पॉन्ड औसतन 15 लाख लीटर वर्षा जल का संग्रहण हो रहा है, जिससे सिंचाई, सब्जी उत्पादन और फलदार पौधारोपण के लिए अतिरिक्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। पहले यह बहुमूल्य वर्षा जल व्यर्थ बह जाता था, जिससे भूमि कटाव और पोषक तत्वों का क्षरण होता था, लेकिन अब भूमि संरक्षण के साथ-साथ भूजल स्तर में भी वृद्धि हुई है। (रमेश कुमार मीना अधीक्षण अभियंता, जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग, सीकर )
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