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सीकर में 15 सितंबर को होगा श्रावणी उपाकर्म, वैदिक विधि-विधान से होंगे धार्मिक अनुष्ठान



सीकर: भारतीय वैदिक संस्कृति, संस्कार और ऋषि परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से सीकर में 15 सितंबर को श्रावणी उपाकर्म का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व से जुड़े इस आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

आयोजकों के अनुसार श्रावणी उपाकर्म का आयोजन 15 सितंबर 2026, मंगलवार को प्रातः 8 बजे गोविन्दम मैरिज गार्डन एवं खाकी जी का अखाड़ा, सीकर में होगा। आयोजन पंडित नरेश जी जोशी के सानिध्य में वैदिक परंपरा एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया जाएगा।

आयोजन की जानकारी देते हुए अटल तिवाड़ी ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म केवल यज्ञोपवीत परिवर्तन का धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, स्वाध्याय, संकल्प और ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर पर व्यक्ति अपने जीवन में सदाचार, संयम, कर्तव्यनिष्ठा और आध्यात्मिक अनुशासन को अपनाने का संकल्प लेता है।

विभिन्न वैदिक अनुष्ठान
कार्यक्रम में सर्वप्रथम स्नान एवं शुद्धिकरण के पश्चात हेमाद्रि संकल्प और दशविधि स्नान की प्रक्रिया संपन्न होगी। इसके बाद देव तर्पण, ऋषि तर्पण एवं पितृ तर्पण किया जाएगा। साथ ही शालिग्राम पूजन, ऋषि पूजन एवं यज्ञोपवीत पूजन के धार्मिक अनुष्ठान होंगे।

विधि-विधान के अनुसार पुराने यज्ञोपवीत का विसर्जन कर नवीन यज्ञोपवीत धारण कराया जाएगा तथा गायत्री मंत्र का जप किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।

अटल तिवाड़ी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता ज्ञान, संस्कार और परंपराओं की निरंतरता है। श्रावणी उपाकर्म इसी सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो हमें अपने ऋषियों और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ जीवन में सदाचार, संयम, स्वाध्याय और कर्तव्यनिष्ठा का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संस्कार और वैदिक परंपराओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है। ऐसे धार्मिक आयोजन हमारी प्राचीन परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का कार्य करते हैं।

आयोजकों ने सीकर के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों, समाजबंधुओं एवं श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रावणी उपाकर्म में सहभागी बनने तथा वैदिक संस्कारों के इस पुण्य अवसर का लाभ लेने का आह्वान किया है।

“श्रद्धा से संस्कार, संस्कार से चरित्र और चरित्र से सशक्त समाज—यही श्रावणी उपाकर्म का संदेश है।”