कासली (सीकर): वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (37 पिच्छिका) ने रविवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कासली में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण है। सांसारिक सुख क्षणिक हैं, जबकि संयम, सदाचार और धर्म का मार्ग ही जीवन को सफल और सार्थक बनाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य को क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों से दूर रहकर आत्मचिंतन करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने मन, वचन और कर्म को संयमित कर लेता है, वही वास्तविक अर्थों में धर्म का पालन करता है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार में सत्य, अहिंसा, क्षमा और करुणा का पालन करना ही सच्ची धर्म आराधना है।
उन्होंने श्रावकों से जिनवाणी के अध्ययन, गुरुओं के प्रति श्रद्धा और संस्कारयुक्त जीवन अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को धार्मिक एवं नैतिक संस्कार देना परिवार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि घर में संस्कार होंगे तो समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त बनेगा।
आचार्य श्री रविवार को कासली स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में रात्रि विश्राम के लिए विराजमान हुए। श्रद्धालुओं ने मंगल प्रवेश पर भक्ति भाव से अगवानी कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मसभा में उपस्थित रहे।
सोमवार सुबह होगा नाथावतपुरा के लिए मंगल विहार
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (37 पिच्छिका) का सोमवार 20 जुलाई को प्रातः 5:15 बजे कासली से लगभग 6 किलोमीटर दूर श्री राजपूत सभा भवन (श्री राजपूत समाज अतिथि गृह), ठिकाना-नाथावतपुरा (सीकर) के लिए संभावित मंगल विहार होगा। भक्तों से समय पर उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की गई है।